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Ramadan kareem dear friends
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bhut khoob zaara saheba
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Muje yakeen hai muhabbat usi ko kehte hain, ...Ke zakhm taza rahe aur nishan chala jae. … Unknown
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Wah
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yuN hi roz milne ki aarzoo badi rakh rakhaao ki guftugoo........ye shrafateiN nahi beghraz usse aapse koi kaam hai (Basheer Badr)
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bhut khoob Tariq sahab
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Pls post your ghazal in this section
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Bohat khoobsurat ghazal
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Welcome to Aashnai Tariq sahab
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सुना हैं के लोग उसे गिरते-सँभलते देखते हैं, चलो आज हम भी घर से निकलके देखते हैं सुना हैं के उसके साथ सदिया जल्द बीत जाए, अगर ऐसा हैं तो उसके साथ चलके देखते हैं, सुना हैं दिन में जमाना उसका तवाफ़ करता हैं सुना हैं रात में जुगनू उसे मचल के देखते हैं सुना हैं के उसे बहुत ही मुहब्बत हैं गुलो से, चलो हम खुद को गुलाब में बदलके देखते हैं सुना हैं के याद करने वालो से मिलते है वो, फिर हम भी उनकी याद में टहलके देखते हैं! सुना हैं सामने गर वो हो तो यकीन नहीं आता, ऐसा हैं तो हम अपनी आँखे मलके देखते है! सुना हैं के उसका शहर सजा रहता हैं फूलो से, ऐसा हैं तो उसके शहर से निकलके देखते है! सुना हैं के उनके इश्क़ में सब पागल हो जाते हैं, चलो फिर हम उनके इश्क़ में मचलके देखते हैं सुना हैं के वो मरने वालो को मरने नहीं देता, हम हाशिये पे होके अंदाज़ अजल के देखते हैं सुना हैं शाम का वक़्त उसे सुहावना लगता हैं, फिर आज हम शाम की तरह ढलके देखते हैं सुना हैं की जलने वालो पे उसे तरस नहीं आता, लो हम भी फिर आतिश में जलके देखते हैं! सुना था जो उसे सोच भी ले शायर बन जाए, सच हैं अंदाज़ अलग आज ग़ज़लके देखते हैं सुना हैं के पहाड़ो पर घूमने आयेगा वो कभी, फिर ठीक हैं खुद को यही सम्भलके देखते हैं सुना हैं 'तनहा' उसको शायरी भी पसंद है, ये बात हैं तो हम किसी शेर में ढलके देखते हैं!
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khoob
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Naqsha utha ker koi aur shaher dhoondiye... Is sheher me to sab se mulaqat hogayi _Nida fazli
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Wah
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Jaadu hai ya tilism tumhaari zubaan mai...........tum jhoot keh rahe they, mujhy eytebaar tha (Bekhud, Dehelvi)
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bhut khoob sharing Zaara saheba
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Tu ShaheeN hai parwaaz hai kaam tera ...Tere saamne aasmaN aur bhee hain - Iqbal
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Waaah kya baat hai
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Tum shajar ko zara dilaasa do.........meiN parindey bula ke laata huN (Arshad Niyazi)
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shukriyah Zaara saheba................bhut khoob